शापित गांव की कहानी Cursed village story

शापित गांव की कहानी 

शापित गांव की कहानी Cursed village story
शापित गांव की कहानी Cursed village story

यह कहानी है एक गांव की जिसको एक संत ने शाप दिया , उस गांव में एक राजा रहते थे जिनका नाम था विजेंद्र सिंह बहुत है ही जिंदादिल व्यक्ति थे। और शरीर से हष्ट पुष्ट थे। उनके गांव वाले उनको बहुत चाहते थे क्योकि वो गांव वालो की हमेशा मदद करते थे। 





 उनके गांव में जब भी कोई समस्या आती तो सारे गांव वाले उनसे मिलने जाते और वो राजा उनकी समस्या का हल बहुत ही आसानी से निकाल देते। उनका फैसला हमेशा सही होता वो हर हाल में गांव वालो को खुश रखना चाहते थे।एक बार की बात है गांव में बहुत ही भयंकर अकाल पड़ गया सभी लोग बहुत ही परेशान थे। उनके पास में खाने का अनाज भी धीरे धीरे ख़त्म हो रहा था।





 सभी गांव वाले इक्क्ठे होकर राजा की हवेली पहुंचे हालांकि राजा को पहले से ही पता था की गांव वाले उनके पास क्यों आये है। राजा ने गांव वालो की पूरी समस्या सुनी उनको पिने का पानी नहीं मिल रहा है गांव में खाने के लिए अनाज नहीं सभी लोग भूखे मर रहे है। ऐसे में क्या किया जाए ये बात गांव वालो ने राजा को बतायी। इतने में एक व्यक्ति ने राजा से कहा की अगर यही हाल रहा तो हम लोगो को यह गांव छोड़कर जाना पड़ेगा। गांव वालो की समस्या सुनकर राजा बहुत ही व्याकुल हो गए। 





 लोग अगर गांव छोड़कर चले जाएंगे तो गांव तो सुनशान हो जाएगा। राजा की अगर प्रजा ही नहीं होगी तो वो राजा राजा नहीं रहता। ये चिंता राजा को सताए जा रही थी। पर अब राजा करे भी तो क्या करे। फिर भी राजा वालो से उनकी समस्या का निवारण करने का वादा किया। 



| राजा ने अपने महल में जो भी अनाज व् जल संग्रहण किया हुआ था वो गांव वालो में बटवाया ताकि कुछ दिन तो गांव वालो को राहत मिले। राजा ने जो अनाज और पानी गांव वालो के लिए भेजा वो मात्रा १ हफ्ते भर के लिए ही प्रयाप्त था। अब राजा को ये चिंता खाये जा रही थी की अगर ये खाने पिने का सामान अगर समाप्त हो गया तो गांव वाले निश्चित ही गांव छोड़कर चले जाएंगे। राजा उनको खाद्य सामग्री वितरण के अगले दिन ही गांव से पलायन के निकल पड़े ताकि कोई ना कोई समाधान वो ढूंढ सके। राजा २ रात और एक दिन लगातार चलते रहे उनके राज्य की सीमा से वो बाहर चले गए थे। 






आगे एक घना जंगल आ चुका था जंगल बहुत ही हरा भरा था वहा एक छोटा तालाब भी था। राजा ने तालाब से पानी पिया और अपनी प्यास बुझाई और कुछ फलो के पेड़ से फल तोड़कर खाये और अपनी भूख भी शांत की। वही पास में एक गुफा थी जिसके अंदर से मंत्र जाप की आवाज राजा को सुनाई देने लगी। राजा एक बार तो घबराये की इस वीरान जंगल में कौन मंत्र जाप कर रहा है। लेकिन वो निडर थे उन्होंने अपनी तलवार उठायी और गुफा के अंदर प्रवेश कर गए। जब वो अंदर पहुंचे तो उन्होंने देखा की एक महात्मा अपनी योग मुद्रा में लीन बैठे हुए है। अंदाजे से उनकी उम्र करीब ८० ९० साल दिखाई दे रही थी।





 राजा ने महात्मा को झुककर प्रणाम किया। जैसे ही राजा ने उनको प्रणाम किया। महात्मा ने अपनी आँखे खोली। महात्मा ने राजा से पूछा आप इस घने जंगल में क्या लेने आये है। तब राजा ने अपनी सारी समस्या का बखान महात्मा से किया। तब महात्मा ने अपना अंतरध्यान लगाया। अंतरध्यान लगाने के बाद महात्मा ने राजा से कहा की तुम्हारे गांव को एक बहुत ही पुराना शाप लगा हुआ है।







 करीब २०० साल पहले तुम्हारा गांव भी एक जंगल हुआ करता था वहा से संत महात्मा अपनी तपस्या कर रहे थे , तब तुम्हारे ही किसी पूर्वज ने उनकी तपस्या भंग कर दी और वहा उस जगह अपना गांव बसाने का फैसला किया था। तब उस संत ने तुम्हारे पूर्वज को ये शाप दिया की तुमारे गांव में तुम्हारी हर पीढ़ी में अकाल पडेगा जिससे ये गांव कभी सुखी नहीं रह पायेगा। तब राजा ने महात्मा से इस समस्या का निवारण पूछा। संत ने कहा की होनी को कोई नहीं टाल सकता ये शाप अटल है। 






 फिर भी इसका एक उपाय हो सकता है। राजा ने कहा में कुछ भी करने को तैयार हु बस आप मुझे वो उपाय बता दीजिये। तब महात्मा ने कहा की हिमालय की गोद में उत्तर दिशा की तरफ ५०० फिट ऊपर एक गुफा है जहा उन संत महात्मा की समाधि है उस समाधी तक तुम्हे नंगे पाँव जाना होगा वहा जाकर दंडवत प्रणाम करके अपने पूर्वजो की गलती की क्षमा मांगोगे तो ये शाप टलेगा। राजा ने संत को धन्यवाद कहा और उनको प्रणाम करके अपने गांव चला गया | 





 राजा ने ये सारी बात अपने गांव वालो को बतायी और गांव वालो से आग्रह किया की जब तक में अपनी यात्रा से ना लोटू कोई भी ये गांव छोड़कर ना जाए कैसे भी करके आप मेरे आने का इंतजार करे । ऐसा कहकर राजा हिमालय की और लगे पाँव चल पड़ा ९ दिन बाद राजा बहुत ही मुश्किलों का सामना करते हुए हिमालय की उस गुफा में जा पहुंचे वहा उन्होंने संत की समाधि देखि। उन्होंने समाधि को दंडवत प्रणाम करके क्षमा मांगी। जैसे ही उन्होंने क्षमा मांगी राजा के गांव में मूसलाधार बारिश होना शुरू हो गयी। राजा अपने गांव लौटा तो देखा की गांव के नदी नाले तालाब सब पानी से भरे हुए और चारो और हरी घास उग गयी।



 गाये बकरिया भेड़ सबको खाने के लिए चारा मिल गया लोगो को पिने के लिए पानी मिल गया। अब लोग आसानी से अपनी खेती कर सकते थे।


 तो दोस्तों ये थी एक संत के शाप की कहानी इस कहानी से दोस्तों हमे ये सिख मिलती है की जाने अनजाने कभी किसी को ठेस नहीं पहुचानी चाहिए और संत महात्मा का दिल नहीं दुखाना चाहिए।

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