जिद्दी राजकुमार की कहानी Stubborn prince story
एक गांव में एक राजा रहते थे जिसका नाम सूंदर सिंह था, राजा का एक बहुत बड़ा महल था सूंदर सिंह से उनकी गांव की सारी प्रजा बहुत ही खुश रहती थी , उनका न्याय करने का तरीका बहुत ही अच्छा था कभी भी किसी गुनहगार को वो सजा दिए बिना नहीं रहते हमेशा सही फैसला सुनाते थे राजा का एक बेटा था जिसका नाम राजकुमार महेंद्र सिंह था राजकुमार महेंद्र सिंह बहुत ही जिद्दी किस्म का था ! राजा के दरबार में एक पंडित जी थे जिनका नाम रामनाथ था , पंडित जी बहुत विद्वान थे , राजकुमार महेंद्र सिंह के ख़ास आदमी थे ,
राजा का बेटा उससे हर बात पूछता था क्या करना है क्या नहीं , लेकिन राजकुमार जिद्दी बहुत था , पर पंडित जी की हर बात मान जाता था , एक दिन राजा सूंदर सिंह ने राजकुमार के विवाह के बारे में सोचा और राजकुमार को अपने पास बुलाया और कहा की बेटा हमने तुम्हारी शादी के लिए एक राजकुमारी देखी है , जो हमारे पडोसी गांव कुंदनगढ़ के राजा कुंदन सिंह की पुत्री है , राजकुमार महेंद्र सिंह ने अपने पिता से कहा पिताजी मुझे अभी विवाह नहीं करना है , राजा सूंदर सिंह ने अपने बेटे महेंद्र सिंह को बहुत समझाया लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा रहा और बार बार इंकार कर रहा था , और राजकुमार वह से चला गया !
तब राजा ने पंडित रामनाथ को बुलाया और उनसे कहा पंडित जी आप कैसे भी करके राजकुमार को इस शादी के लिए राजी कीजिये ! तब पंडित जी ने कहा ठीक है में राजकुमार से बात करूँगा इस समय राजकुमार सिपाहियों के साथ बाहर शिकार पे गए हुए है वापस लौटते ही मैं उनसे बात कर लूंगा ! राजा ने कहा ठीक है पंडित जी ! जब शाम को राजकुमार शिकार से वापस अपने महल लौटे और कुछ देर आराम फ़रमाया ! पंडित राजकुमार पर नजर रखे हुए थे , और जब राजकुमार प्रश्नचित नजर आये तब पंडित जी ने राजकुमार को अपने पास बुलाया और उनसे विवाह करने की बात की और उनको समझाया , बड़ी मुश्किल से पंडित जी ने राजकुमार को शादी के लिए राजी कर ही लिया !
और एक माह बाद विवाह तय हो गया था , अगले ही दिन शाम को पंडित जी अपने घर जा रहे थे की रास्ते में एक बरगद का पेड़ था उस पेड़ पर चकवा(एक पक्षी का नाम ) पक्षी का जोड़ा बैठा हुआ आपस में बात कर रहा था , पंडित जी इतने विद्वान थे की उनको उन पक्षियों की भाषा भी समज में आती थी , वो पक्षी कह रहे थे की हमारे गांव के जो राजकुमार है वो जब शादी के लिए बारात लेके जायेंगे तब वापस आते समय राजकुमार की मौत हो जायेगी !
इतना सुनते ही पंडित जी वहा रुक गए और आराम का बहाना बनाते हुए उनकी बातें सुनने लगे , तब दूसरे पक्षी ने पूछा की राजकुमार की मौत कैसे होगी , तब उस पक्षी ने कहा की जैसे ही राजकुमार का विवाह संपन्न होगा और राजकुमार बारात लेके लौट रहा होगा रास्ते में एक बहुत बड़ा पेड़ आएगा उसके निचे से जब बारात गुजरेगी उसी समय उस पेड़ की एक बहुत बड़ी डाल टूटकर सीधे राजकुमार पे गिरेगी और उसके सर में चोट लगने से वह मर जाएगा ! अगर यहाँ से कोई अगर राजकुमार की जान बचाता है तो फिर रास्ता में एक एक ऐसा गड्ढा आएगा जो राजकुमार के रथ चालाक को नहीं दिखेगा और रथ का पहिया उसमे टिकेगा और राजकुमार जमीन पर गिर जायेगा , जमीं पर गिरने से एक बड़े पत्थर की चोट सर में लगने से राजकुमार मर जाएगा !
और अगर इस घटना से भी राजकुमार बच जायेगा तो , रास्ते में जब राजकुमार लघु शंका (पिसाब) के लिए अपने रथ को रोकेंगे उस समय एक पागल कुत्ता आएगा जिसको एक ऐसी बीमारी हो रखी है जैसे ही वो कुत्ता राजकुमार को काटेगा तो कुछ ही क्षण में राजकुमार मर जायेगा !
और अगर राजकुमार वह से भी बच जायेगा और जब वह अपने महल पहुंचेगा तब मुख्य द्वार पर जब उसका सभी लोग स्वागत करेंगे उस समय मुख्य द्वार के ऊपर लगा एक झरोखा राजकुमार के ऊपर गिर जायेगा और राजकुमार मर जायेगा !
अगर राजकुमार वहा से भी बच जाता है तो अंत में जब वो रात को अपने कमरे में सुहाग रात वाली रात जब सो रहा होगा तब उसको एक काला सांप काट लेगा और राजकुमार वही पर मर जायेगा ! अगर यहाँ राजकुमार को कोई बचा ले तो राजकुमार की उम्र पुरे १०० साल की होगी ! तब दूसरे पक्षी ने पूछा की अब राजकुमार को कौन बचा सकता है तब उस पक्षी ने कहा की जो व्यक्ति हमारी भाषा समज सकता है वही राजकुमार की जान बचा सकता है , अभी तो राजकुमार की शादी में १ महीना बाकी है , इसलिए जब भी कोई व्यक्ति हमारे पेड़ के निचे से गुजरेगा तब हम ये बातें करेंगे हो सकता है हमारी बातें कोई समज जाए और राजकुमार को बचा ले , लेकिन इसमें एक और बात यह है की जो व्यक्ति राजकुमार को बचाएगा , अगर उसने यह बातें किसी को बता दी तो वह जान बचाने वाला व्यक्ति वही पर पत्थर का बन जाएगा , और वह तब तक पत्थर का बना रहेगा जब तक , वह व्यक्ति जिसको ये बात बताई वो अपने बेटे को मारकर उसके खून के छींटे जब तक उस पत्थर की मूर्ति पर नहीं गिराएंगे तब तक वह व्यक्ति पत्थर का बना रहेगा , और दूसरी बात यह की अगर वह व्यक्ति अपने बेटे के खून के छींटे अगर नहीं गिरायेगा तो उसका बेटा पच्चीस साल का होते ही मर जायेगा !
पंडित जी पेड़ के निचे बैठे बैठे यह पूरी बात सुन चुके थे , जब उन पक्षियों ख़त्म हो गयी तब पंडित जी वहा से अपने घर चले गए ! और घर कर सोचने लगे की कैसे भी करके जान बचानी और ये बात वो किसी को बता भी नहीं सकते थे क्योकि अगर वो ये बात किसी को बता देंगे तो वो खुद पत्थर के बन जायेंगे ! इसलिए पंडित जी बुरी तरह से फसे हुए थे करे भी तो क्या करे ! समय बिता और वो दिन आ गया जब राजकुमार की शादी तय हुई थी ! सभी लोग शादी की तयारी में जुटे हुए थे पंडित जी को तो एक ही फ़िक्र हो रही थी की कैसे भी करके राजकुमार की जान कैसे बचाई जाए ! अब राजकुमार की बारात रवाना हो गयी , पंडित जी भी राजकुमार की बारात में रवाना हो गए ! अब बारात कुंदनगढ़ गांव पहुंच गयी !
कुछ समय बाद पुरे रस्मो रिवाजो के साथ शादी हो गयी ! अब दूसरे दिन बारात वापस सुंदरगढ़ आने के लिए रवाना हो गयी ! अब पंडित जी बहुत ही सतर्क हो गए क्युकी उनको राजकुमार की जान बचानी थी ! बारात एक दो मिल आगे आयी तो रास्ते में एक बहुत बड़ा पेड़ आया उसी पेड़ के निचे से बारात जाने वाली थी की पंडित जी ने एक जोर की आवाज लगायी और सबको रुकने का बोला पूरी बारात वही रुक गयी , पंडित ने बारात को दूसरे रास्ते से जाने को कहा अब सभी लोगो पंडित जी की बात को मानते हुए रास्ता बदल दिया !
रास्ता बदलते ही पेड़ की एक बहुत बड़ी शाखा धड़ाम से जमीं पर गिरी सब लोग ये देखकर हक्के बक्के रह गए ! पंडित जी ने चैन की सांस ली ! अब बारात थोड़ी आगे बढ़ी ! पंडित जी को अब पता था की रास्ते में बड़ा गड्ढा आएगा तो पंडित जी बहुत ही ध्यान पूर्वक राजकुमार के रथ के आगे आगे चलने लगे जैसे ही पंडित जी ने वो गड्ढा देखा एकदम से उन्होंने सबको रुकने को कहा और बोले यहां बहुत बड़ा गड्ढा है ध्यान पूर्वक आगे बढे , सभी रथ चालक ने ध्यान पूर्वक सावधानी से वहा से अपने रथ निकाल लिए और आगे बढ़ गए , पंडित जी ने दूसरी बार भी राजकुमार की जान बचा ली ,कुछ दुरी पर जाने के बाद थोड़ी देर बाद राजकुमार को लघु शंका(पिसाब) आयी तो राजकुमार ने पंडित जी को इसारा करते हुए कहा की मुझे लघु शंका जाना है , पंडित जी सावधान हो गए और एक बड़ी लाठी हाथ में लेली ! और राजकुमार के साथ चलने लगे इतने में वहा एक पागल कुत्ता दौड़ता हुआ राजकुमार की तरफ आ रहा था , पंडित जी ने उस कुत्ते को देख लिए और उसको लाठी से मारकर दूर भगा दिया कुत्ता वहा से दूर भाग गया !
राजकुमार लघु शंका (पिसाब) करके वापस अपने रथ में जाकर बैठ गया ! अब कुछ ही दुरी पर राजकुमार का गांव सुंदरगढ़ था ! पंडित जी को अभी राजकुमार को दो और जानलेवा घटना से बचाना था ! जैसे ही राजकुमार की बारात सुंदरगढ़ पहुंची और राजकुमार का स्वागत करने सारे नौकर चाकर और उनके घरवाले महल के मुख्य द्वार पर खड़े , तब पंडित जी ने सबको ये कहते हुए मुख्य द्वार से हटने को कहा की , राजकुमार का और उनकी पत्नी का स्वागत मुख्य द्वार पर नहीं बल्कि दूसरे द्वार पर करना होगा सभी लोग पंडित को पागल समझने लगे और बातें करने लगे की , नवी नवेली दुल्हन और दूल्हे का तो हमेशा से ही मुख्य द्वार पर स्वागत करना चाहिए , लेकिन राजा ने कहा ठीक है पंडित जो आप कहे , ऐसा कहते हुए सब लोग दूसरे द्वार पर पहुंच गए और वहा उनका स्वागत शुरू किया , स्वागत शुरू करते ही मुख्य द्वार का बड़ा झरोखा धड़ाम के साथ निचे आ गिरा , सब लोगो हलचल मच गयी और उन्होंने पंडित जी को धन्यवाद दिया की आज अगर मुख्य द्वार पर स्वागत होता तो राजकुमार और इतने सारे लोग भी मरते ! सभी लोग खुशिया मनाने लगे , अब पंडित जी बहुत सोच में डूबे हुए थे क्युकी अभी भी राजकुमार की जान को खतरा था , वो सब ठीक है लेकिन पंडित जी के लिए एक बहुत बड़ी दुविधा थी की वह सुहागरात वाली रात राजकुमार के कमरे में कैसे जायेंगे और अगर चले भी गए तो राजकुमार को क्या जवाब देंगे की वो उनके कमरे में क्या कर रहे है ! लेकिन पंडित जी को तो कैसे भी करके राजकुमार की जान बचानी थी !
अब धीरे धीरे शाम ढलने लगी और रात हो गयी , पंडित जी बड़ी चतुराई से राजकुमार के शयन कक्ष में जाकर छुप गए और अपने साथ एक तेज़ धारधार कटार भी लेके आये ! कुछ समय बाद राजकुमार और उनकी पत्नी सायं कक्ष में आये , पंडित जी अंदर छिपे हुए थे राजकुमार की जान बचाने के लिए और फर्श पर सांप के आने का इंतजार कर रहे थे , राजकुमार ने अपनी सुहागरात मना ली और वो दोनों सो गए , पंडित जी तो बस सांप की राह देख रहे थे , राजकुमार और उनकी पत्नी गहरी नींद में सो गए , तभी पंडित जी को सरसराहट की आवाज आयी पंडित जी ने अपनी धारदार कटार बाहर निकाली और सावधान हो गए !
सांप धीरे धीरे राजकुमार के बिस्तर की तरफ आगे बढ़ रहा था और बिस्तर पर पहुंचने ही वाला था की पंडित जी दबे पाँव आये और सांप का फन अपनी कटार से काट दिया बिना किसी आवाज के , और मरे हुए सांप को एक कपडे की झोली में डाल दिया ! पंडित जी जैसे ही मुड़ने लगे की अचानक उनकी नजर राजकुमार की पत्नी के मुख पर पड़ी और उन्होंने देखा की कुछ खून की बुँदे पत्नी के गाल पे पड़ी हुई थी , पंडित जी ने सोचा अगर ये खून राजकुमारी के मुँह में पहुंच गया तो वह मर जाएगी तो उन्होंने उसको साफ़ करने का सोचा , वो एक कपडा लेके हलके हाथ से ज्यो ही वो खून साफ़ करने के लिए राजकुमारी की तरफ झुके और साफ़ करने लगे खून तो साफ हो गया लेकिन अचानक राजकुमार की आँख खुल गयी और उन्होंने पंडित जी को अपनी पत्नी के पास खड़े देखा , और राजकुमार जोर से चिल्लाया पंडित जी आप मेरे कमरे में क्या कर रहे हो और वो भी मेरी पत्नी के पास , राजकुमार गुस्से से तिलमिला गया !
पंडित जी कुछ बोल नहीं पा रहे थे क्युकी उनको पता था की अगर में सच बोलूंगा तो में पत्थर का बन जाऊंगा और इसकी कीमत चुकाना राजकुमार को भारी पड़ जायेगा , अब राजकुमार बस लगातार यही बात बोल रहा है की आप यहाँ क्यों आये मेरे कमरे में और मेरी पत्नी के पास में खड़े होकर क्या कर रहे थे , राजकुमार ने पंडित जी को बहुत ही भला बुरा कहा और बहुत अपशब्द कहे , पंडित जी बोले भी तो क्या बोले , राजकुमार तो अपनी जिद्द पे अड़ा हुआ था , तब पंडित जी ने राजकुमार से कहा की राजकुमार में यहाँ तुम्हारी भलाई के लिए ही आया हु , तब राजकुमार ने कहा इतनी रात गए मेरे कमरे में आना कोनसी भलाई है जरा बताइये , ये सारा शोर सुनकर महल के सभी लोग जाग गए और वहा भीड़ हो गयी पंडित जी चुपचाप खड़े थे , राजकुमार के पिता भी वहां आ गये !
और ये सब देखने लगे , तब राजकुमार ने कहा पंडित जी आखरी बार में आपसे पूछ रहा हु की आप यहाँ क्या कर रहे थे , तब पंडित जी ने कहा राजकुमार अगर में यह सब बात तुम्हे बता दूंगा तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जायेगा ! राजकुमार ने कहा चाहे कैसा भी अनर्थ हो मुझे यह बताना ही होगा तुम यहाँ क्या कर रहे थे , तब पंडित जी ने सोचा अगर में इन्हे यह बात नहीं बताऊंगा तो मुझे वैसे भी यह जीवित नहीं छोड़ेगा , तब पंडित जी ने कहा ,की मे पक्षियों की भाषा जानता हु और में तुम्हे यहाँ सांप से बचाने आया था और मेने तुम्हारी पांच बार जान बचाई है , पहला गिरते हुए पेड़ से दूसरा बहुत बड़े गड्ढे से
तीसरा पागल कुत्ते से , और चौथा तुम्हारे महल के झरोके गिरने से , और आज ये पांचवी बार सांप से , और उन्होंने झोली में मरा हुआ सांप दिखाया , और कहा में राजकुमारी के गाल पे लगा सांप का खून साफ़ कर रहा था !
में यह बातें तुम्हे इसलिए नहीं बता रहा था की ये बताने से में पत्थर का बन जाऊंगा और इसकी कीमत तुम्हे अपने पहले बेटे की बलि देकर उसके खून से चुकानी पड़ेगी , मेरे पत्थर के शरीर पर जब तक तुम अपने बेटे के खून से छींटे नहीं डालोगे तब तक में पत्थर का बना रहूँगा , और अगर तुमने अपने बेटे की बलि नहीं दी तो तुम्हारा बेटा पच्चीस साल का होते ही मर जाएगा , इतना कहते ही पंडित धीरे धीरे पाँव की तरफ से पत्थर के बनने शुरू हो गये , तब राजकुमार बहुत पछताने लगा और उनके सामने गिड़गिड़ाने लगा रोने लगा , खूब पछताया तब पंडित जी ने राजकुमार से कहा राजकुमार मेने तुम्हे पहले ही मना किया था की बहुत बड़ा अनर्थ हो जाएगा लेकिन तुम नहीं माने , तुमने बहुत जिद्द किया तब ये बातें मेने तुम्हे बतायी , इसलिए हमेशा याद रखना जिंदगी में की कभी भी इतना जिद्द मत करना !
ये कहते है पंडित जी पुरे पत्थर के बन गए , अब राजकुमार बहुत रोने लगा , उसके घर वाले बहुत दुखी हुए , क्युकी राजकुमार की होने वाली संतान की बलि देनी थी , अगर वह उसकी बलि नहीं देंगे तो उनकी संतान भरी जवानी में पच्चीस साल का होते ही मर जायेगी ! राजकुमार ने यह तय किया की में अपनी होने वाली संतान की बलि दूंगा , नहीं तो पच्चीस साल का होकर अगर मेरा बेटा मरेगा तो मुझे ज्यादा दुःख होगा और मेरे बुढ़ापे का सहारा टूट जाएगा , नौ महीने बाद राजकुमार की पत्नी ने एक बच्चे तो जन्म दिया राजकुमार के लिए और उनके घर वालो के लिए ये दिन बहुत ख़ुशी का भी था और बहुत गम का भी के उनके वंश की बलि देनी पड़ेगी , उस बच्चे की बलि देकर उसके खून के छींटे जब उस पत्थर के पंडित जी पे डाले तब पंडित जी वापस इंसान बने !
तो दोस्तों ये थी जिद्दी राजकुमार की कहानी इस कहानी से हमे यह सिख लेनी चाहिए की ज्यादा जिद्द कभी नहीं करना चाहिए !

Amazing story
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